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Gita Press

Bhagwan Se Apanapan - 408

Bhagwan Se Apanapan - 408

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भगवान से अपनापन (पुस्तक कोड: 408), गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित एक अत्यंत भावपूर्ण और आत्मिक संबंध को दृढ़ करने वाली पुस्तक है, जिसकी रचना श्री स्वामी रामसुखदास जी महाराज द्वारा की गई है। इस ग्रंथ में यह समझाया गया है कि भगवान केवल उपास्य नहीं, बल्कि हमारे अपने हैं — परम आत्मीय, सखा, स्वामी और हितैषी।

स्वामी जी ने सरल, सहज और हृदयस्पर्शी भाषा में बताया है कि जब साधक भगवान को केवल पूजनीय नहीं, बल्कि "अपने" मानकर उनसे आत्मीयता का संबंध स्थापित करता है, तभी जीवन में सच्चा शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक आनंद उत्पन्न होता है।

यह पुस्तक पाठकों को ईश्वर के प्रति अपनत्व, विश्वास, प्रेम और समर्पण की ओर प्रेरित करती है। यह उन साधकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो भक्ति में भाव, निकटता और आत्मीयता की अनुभूति पाना चाहते हैं।

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