Gita Press
Bhavrog Ki Ramban Dawa - 345
Bhavrog Ki Ramban Dawa - 345
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भवरोग की रामबाण दवा (पुस्तक कोड: 345), गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित एक अत्यंत उपयोगी, जागृति प्रदान करने वाली और आत्मकल्याण हेतु प्रेरणादायक पुस्तक है, जिसकी रचना महान संत पूज्य श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी ने की है। इस पुस्तक में यह बताया गया है कि जीवात्मा जन्म-मरण के चक्ररूपी भवरोग से किस प्रकार पीड़ित है, और इस रोग की एकमात्र रामबाण दवा ईश्वर भक्ति, सत्संग, नाम-स्मरण, सेवा और आत्म-संयम है।
लेखक ने अत्यंत सरल और प्रभावशाली भाषा में समझाया है कि यह संसारिक चक्र एक रोग के समान है, जिससे मुक्ति केवल ईश्वर के शरणागति द्वारा ही संभव है। यह पुस्तक पाठक के अंतःकरण में वैराग्य, भक्ति और आत्म-चिंतन की भावना जगाती है।
यह ग्रंथ उन साधकों और जिज्ञासु पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो जीवन के आवागमन रूपी भवरोग से मुक्ति पाकर स्थायी शांति और परमात्मा की प्राप्ति करना चाहते हैं।
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