“ब्रह्मचर्य — कब, क्यों और कैसे?”, श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज द्वारा रचित और ट्रस्ट राधा केली कुंज, वृंदावन द्वारा प्रकाशित, ब्रह्मचर्य के गूढ़ सिद्धांतों को सरल और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है। इस ग्रंथ में बताया गया है कि ब्रह्मचर्य केवल शारीरिक संयम नहीं, बल्कि मन, वाणी और कर्म की पवित्रता का जीवन-साधन है। श्री महाराज जी ने अत्यंत सरल भाषा में समझाया है कि ब्रह्मचर्य का पालन कब आरंभ करना चाहिए, यह जीवन में क्यों आवश्यक है, और इसे किस प्रकार दृढ़ निश्चय व आस्था के साथ निभाया जा सकता है। यह पुस्तक विशेष रूप से युवाओं, साधकों और गृहस्थों के लिए उपयोगी मार्गदर्शक है, जो आत्मसंयम, शांति, ऊर्जा और ईश्वर-प्राप्ति के पथ पर अग्रसर होना चाहते हैं।
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Brahmacharya Kab, Kyun Aur Kaise? (Shri Hit Radha Keli Kunj)
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