Gita Press
Gita Madhurya - 388
Gita Madhurya - 388
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“गीता-माधुर्य” (पुस्तक कोड – 388), गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, स्वामी रामसुखदास जी महाराज रचित एक प्रसिद्ध हिंदी ग्रंथ है। इसमें श्रीमद्भगवद्गीता के गूढ़ और गहरी भावनाओं को प्रश्न–उत्तर शैली में सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है ताकि सामान्य पाठक भी इसे सुगमता से समझ सकें । यह पुस्तक लगभग 160 पृष्ठों की पेपरबैक होती है और गीता के उपदेशों को दैनिक जीवन तथा मोक्ष-मार्ग में उपयोगी उपायों के रूप में समझाने का लक्ष्य रखती है । यह संस्करण एक सार्वभौमिक ग्रंथ के रूप में प्रतिष्ठित है, जो कर्मयोग से मुक्ति तक के रास्ते को स्पष्ट करता है। स्वामी रामसुखदास जी ने इसे विशेष रूप से प्रश्न–उत्तर प्रारूप में लिखा, जिससे पाठकों को जिज्ञासाएँ समझने में सहूलियत होती है । सरल शब्दों में: गीता-माधुर्य एक सुबोध, संवादात्मक और प्रेरक गीता-टीका है, जो आत्मिक उन्नति और दैनिक जीवन में उपदेशों को लागू करने में मदद करती है। यह नया और पुराने पाठकों—विशेषकर उन लोगों के लिए—उपयुक्त है जो गीता को सीधे, स्पष्ट और संवादात्मक रूप में पढ़ना चाहते हैं।
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