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Gita Press
Nishchint Ho Raho (Gita Vatika)
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"निश्चिंत हो रहो" के लेखक श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी महाराज, एक महान संत, धर्म प्रचारक और हिंदी साहित्यकार थे। इस पुस्तक को गीता वाटिका द्वारा प्रकाशित किया गया है। श्री पोद्दार जी महाराज ने अपनी लेखनी के माध्यम से सरल और प्रभावशाली भाषा में जीवन के गहरे पहलुओं को उजागर किया। "निश्चिंत हो रहो" में उन्होंने मानसिक शांति, आत्म-संयम और भक्ति की महिमा पर बल दिया। पुस्तक में ईश्वर पर अडिग विश्वास और संतुलित जीवन जीने के सरल उपाय दिए गए हैं, जिससे पाठक अपनी परेशानियों से उबरकर सुख और शांति पा सकें। यह पुस्तक आज भी पाठकों को मानसिक शांति, संतोष और निःसंकोच भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
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