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Gita Press

Parlok Aur Punarjanma (Evam Vairagya) - 311

Parlok Aur Punarjanma (Evam Vairagya) - 311

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परलोक और पुनर्जन्म (एवं वैराग्य) — गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह ग्रंथ (पुस्तक कोड 311) प्रसिद्ध लेखक प. पू. जयदयाल गोयन्दका जी द्वारा रचित है। यह पुस्तक जीवन के अत्यंत गूढ़ विषयों — परलोक, पुनर्जन्म और वैराग्य — पर आधारित है, जिन्हें वैदिक दृष्टिकोण से सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें बताया गया है कि मृत्यु ही जीवन का अंत नहीं है, अपितु आत्मा अमर है और कर्मों के अनुसार जीव का पुनर्जन्म होता है। पुस्तक में वेद, पुराण, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता आदि के प्रमाणों के माध्यम से इन विषयों की पुष्टि की गई है। साथ ही, संसार की नश्वरता को समझाकर वैराग्य के महत्व को उजागर किया गया है, जिससे व्यक्ति मोहमाया से हटकर आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर हो सके। यह ग्रंथ श्रद्धालु पाठकों को न केवल आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करता है, बल्कि जीवन के उद्देश्य को समझने की दिशा भी देता है।

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