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Gita Press

Vyavahar Aur Parmarth - 334

Vyavahar Aur Parmarth - 334

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व्यवहार और परमार्थ | पुस्तक कोड: 334 | प्रकाशक: गीता प्रेस, गोरखपुर | लेखक: पूज्य श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार। यह पुस्तक पूज्य श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी द्वारा रचित एक अत्यंत प्रेरणादायक और मार्गदर्शक ग्रंथ है, जिसमें मानव जीवन के दो महत्त्वपूर्ण पक्षों — व्यवहार और परमार्थ — को संतुलित रूप से जीने की दिशा बताई गई है। पुस्तक में यह समझाया गया है कि बाह्य जीवन (व्यवहार) को सच्चे आध्यात्मिक मूल्यों (परमार्थ) से जोड़कर ही जीवन को सार्थक, सुखी और कल्याणकारी बनाया जा सकता है। सरल भाषा और हृदयस्पर्शी शैली में लिखी गई यह कृति आत्मिक उन्नति के साथ-साथ सामाजिक और पारिवारिक जीवन में भी संतुलन एवं शांति लाने की प्रेरणा देती है। यह ग्रंथ गृहस्थ, साधक और जिज्ञासु सभी के लिए उपयोगी व पठनीय है।

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